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पैरों की देखभाल

वृद्धावस्था में पैरों की समस्याएं आम बात हैं तथा यह लम्बे वर्षों से चली आ रही टूट फूट, अनुचित रुप से फिट जूतों,पैरों में रक्त के उचित परिसंचरण में कमी, नाखूनों को न काटा जाना तथा कुछ रोगों के कारण होती हैं।

आप अपने पैरों की नियमित रुप से जांच करके तथा अपने परिवार के सदस्य अथवा पैरों के स्वास्थ्य से संबंधित विशेषज्ञ व्यक्ति द्वारा उनकी जांच करवा कर आप पैरों संबंधी समस्याओं को रोक सकते हैं।

ठण्डे तापमान में उद्भासन, जूतों से पैरों पर दबाव, लम्बे समय तक बैठे अथवा आराम करने से, तथा धूम्रपान करने से पैरों में रक्त का प्रवाह कम हो सकता है। दूसरी ओर, पैरों को उपर उठा कर, खड़े होकर और शरीर को खींच कर, टहलकदमी करने तथा अन्य प्रकार के व्यायाम आदि से बेहतर रक्त संचरण संभव होता है। सौम्यता से मालिश करने तथा हल्के गर्म पानी में पैरों को रखने से भी पैरों में रक्त संचरण में वृद्धि होने में सहायता मिलती है।

आरामदायक, फली भांति फिट होने वाले जूते पहनने से पैरों संबंधी अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। जूते का उपरी हिस्सा नरम, लोचपूर्ण सामग्री से बना होना चाहिए ताकि जूता पैर के आकार हो सके। चमड़े से बने जूते से पैरों तक हवा की आवाजाही बनी रहती है तथा इससे त्वचा में खारिश आदि की संभावना से बचा जा सकता है। सोल से मजबूत पकड़ मिलनी चाहिए न कि वह फिसलने वाला होना चाहिए। कठोर सतहों पर चलते समय मोटे सोल से पैरों पर कम दबाव पड़ता है। ऊंची हील को पहनने से बचना चाहिए।

पैरों को अंधेरे, गीले तथा गर्म स्थितियों में बन्द करके रखा जाता है इसलिए उन पर फंगस आदि पैदा हो जाती है। ऐसे संक्रमणों से लालिमा, फफोले, त्वचा का छीलना तथा खारिश आदि पैदा हो सकती है। यदि इनका शीघ्रतापूर्वक उपचार नहीं किया जाता है तो संक्रमण का जीर्ण रोग का रुप ग्रहण लेते हैं और उनका इलाज करना बहुत ही कठिन कार्य हो जाता है। संक्रमण को रोकने के लिए पैरों, विशेषकर अंगुलियों के बीच के हिस्सों को साफ सुथरा तथा शुष्क रखें और जब भी संभव हो पैरों को धूप और हवा लगाएं। यदि आपको अपने पैरों फंगल संक्रमण होता रहता है तो आपको प्रतिदिन अपने पैरों पर फंगलरोधी पाउडर का छिड़काव करना चाहिए।

कभी कभी शुष्क त्वचा से पैरों में खारिश तथा जलन उत्पन्न हो जाती है। शुष्कता को प्रतिदिन टांगों तथा पैरों पर लोशन लगा कर और हल्के साबुन लगा कर दूर किया जा सकता है।

कॉर्न अथवा घट्टे आदि की उत्पत्ति जूते के साथ हड्डियों से घर्षण और दबाव से उत्पन्न होती है तथा यह पीड़ादायक हो सकती है। कॉर्न के उपचार के लिए शल्य चिकित्सा करनी पड़ती है। अपने आप कार्न अथवा घट्टों को छीलने से हानि हो सकती है,विशेषरुप से जब आप मधुमेह अथवा निम्न रक्त संचरण से पीड़ित हैं। इसलिए यह बेहतर होगा कि आप सही सलाह के लिए अपने डाक्टर से संपर्क करें।

वायरस की वजह से त्वचा के वृद्धि को वार्ट कहा जाता है। अक्सर यह पीड़ादायक होते हैं और यदि इनका उपचार नहीं किया जाता है तो यह फैल जाते हैं। शल्यचिकित्सा अथवा रसायन के साथ इसको जला देना अक्सर उपयोगी साबित होता है।

जब नाखून का कोई टुकड़ा त्वचा को भेद देता है तो अंगूठे का नाखून त्वचा में घुस जाता है तथा ऐसा नाखून को उचित रुप से न काटने के कारण होता है। इसे त्वचा को काट कर हटाया जा सकता है तथा बिना संक्रमण के इसका उपचार करने के उपाय किए जा सकते हैं। पैरों की अंगुलियों के नाखूनों को सीधे सीधे काट कर तथा अंगुली के स्तर के साथ मिलान करते हुए त्वचा भेद कर नाखून के विकास को रोका जा सकता है।

लम्बे समय तक खड़े रहने, पूरी तरह से फिट जूते न पहनने अथवा आवश्यकता से अधिक वजन होने के कारण पैर की हड्डी का बाहर बढ़ने को पदकंट कहा जाता है। पदकंट के इलाज में पैर के लिए उचित सपोर्ट, हील पैड्स, हील कप, दवा इंजेक्शन शामिल हैं तथा इसके लिए कभी कभी शल्य चिकित्सा भी करनी पड़ती है।

मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को अक्सर पैरों पर फफोले तथा संक्रमण हो जाता है। उन्हे विशेष रुप से बहुत अधिक ठण्ड़े अथवा बहुत अधिक गर्म पानी से बचना चाहिए, अपने पैरों की चोट अथवा संक्रमण के लिए निरन्तर जांच करनी चाहिए और धारदार वस्तुओँ अथवा सतहों पर कदम आदि नहीं रखने चाहिए।

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